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13 मई

दिल्ली की सरकार सबसे बेकार

दिल्ली है भ्रष्टाचार की राजधानी

सांसद करवाते है टिकट की ब्लैक मार्केटिंग

४०० की  रेल टिकट बिकती है १६०० में

आज हीं दिल्ली से लौटा हूं। जाने का आरक्षण था लेकिन आने का नही। १२ मई यानी आज गया वापस आना जरुरी था । जिसके काम से गया था उसकी जिम्मेवारी थी टिकट की इसलिये आराम से होटल में बैठा हुआ था । वह परेशान –परेशान था , उसे देखकर मुझे भी तकलीफ़ हुई और लग गया आरक्षण के जुगाड में । जब पता किया तो आश्चर्य हुआ १२०० रुपये का थर्ड एसी के टिकट की किमत थी ४५०० रु० । स्लीपर के चार सौ का टिकट १६०० रु० में बिक रहा था वह भी दुसरे के नाम पर यानी पहले से हीं दलालों ने आरक्षण करवा कर रख लिया था । दरों में समानता थी । खैर मैने वेटिंग लिस्ट का टिकट ले लिया था संभावना थी कि आरक्षण हो जायेगा । अब मैने पता लगाना शुरु किया आखिर खुलेआम नई दिल्ली रेलवे स्टेश्न के आरक्षण कार्यालय के सामने इतने दलाल कैसे घुम रहे हैं। वहां पुलिस बल है लेकिन दलालों को कोई भय नही। पुरा रेलवे महकमा मिला हुआ था । एक सिंडिकेट चल रहा है । एक जगह सभी ट्रेनों की टिकटे बुक होती हैं। सारे दलाल उस सिंडिकेट से जुडे हैं। दलाल सांसद कोटे से भी आरक्षण करवा देते हैं । सांसदों के पीए सांसदो के लेटर पैड का इस्तेमाल करते हैं। सभी सांसदो  को यह पता है । पीए को कोई तनख्वाह तो मिलती नही उपर से सांसदो की बीबी , बच्चे और रखैलों का भी ध्यान रखना पडता है । जरुरत पडने पर सांसदों के लिये दारु और लडकी की भी व्यवस्था का भार पीए पर है । पीए इन्हीं सब तरीके से पैसे का जुगाड करता है , वह सांसदों के दलाल की भुमिका निभाता है । दलालों की कार्यशैली निराली है । शुरु के स्टेशन से अम्तिम स्टेशन तक का टिकट दलाल आरक्षित करवा लेते हैं। २५ वर्ष, ३५ वर्ष और ४३ वर्ष की उम्र का आरक्षण रहता है , उसपर सब खप जाते हैं। ट्रेन खुलने के आधा घंटा पहले तक आरक्षण उपलब्ध मिलता है यानी करेंट बुकिंग भी दलालों के माध्यम से हीं संभव है । खुलेआम रेलवे स्टेशन पर दलाल काम करते हैं , रेलवे के बाबुओं से इनका व्यवहार दमाद की तरह है लगता है रेलवे के बाबुओं के दमाद है दलाल । ट्रेन में भी वही हाल है । वहां दलाल की भुमिका निभाते हैं कैटरिंग के स्टाफ़ । एक खाली बर्थ के लिये ५०० से १००० रु० देना पडता है । हम दो लोग थें , एक ा तो आरक्षण हो गया दुसरा वेटिंग था । खैर पार्शियल वेटिंग पर यात्रा करने की अनुमति है इसलिये दोनो चल दिये । बर्थ एक हीं थी किसी तरह कष्ट करते हुये यात्रा कर रहे थें। एसी थर्ड का आरक्षण था भुबनेश्वर राजधानी में। आना गया था , आरक्षण था मुगलसराय तक । टीटी महोदय को भी अंदाज था इसलिये मुगलसराय में हीं माथे पर आ खडा हुआ । मैने गया तक टिकट बना देने के लिये कहा । सीट नही है बोला फ़िर कहा बना देता हूं। एक टिकट का ३७० यानी दो टिकट का ७४० रु० बताया , जो बंधु मेरे साथ थें तेज थे सीधे बात की नाजायज ले चलने की और सौदा पट गया ३०० रु० में जय हो भ्रष्टाचार चार की । मेरी आदत है  सिगरेट की वह उपलब्ध नही थी । सोचा दारु की व्यवस्था हो जाय तो यात्रा कट जायेगी । दारु तो उपलब्ध कराने के लिये कैटरिंग वाला तैयार था लेकिन दाम बहुत ज्यादा मांग रहा था । मैक डोवल न० १ के क्वार्टर का ३०० रु० , इतना पैसा देने के बाद मुझे नशा नहीं होता इसलिये नही खरीदी दारु । दिल्ली की सरकार की एक खुबी तो है अगर आपके पास पैसा है तो आपके लिये दिल्ली की सरकार यानी केन्द्र की सरकार वेश्या से लेकर टिकट तक उपलब्ध करा सकती है । जय हो बाबा मनमोहन की , रुपमोहिनी सोनिया और मधुर मुस्कान वाले राहुल की ।

 
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Posted by on मई 13, 2011 in Uncategorized

 

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